Bhaav Samadhi Vichaar Samadhi - Kaka Bhajans
Bhaav Samadhi Vichaar Samadhi - Kaka Bhajans
Hymn No. 6323 | Date: 25-Jul-1996
अखियाँ रो रही थी, दिल भी रो रहा था
Akhiyām̐ rō rahī thī, dila bhī rō rahā thā

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)

Hymn No. 6323 | Date: 25-Jul-1996

अखियाँ रो रही थी, दिल भी रो रहा था

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akhiyām̐ rō rahī thī, dila bhī rō rahā thā

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)

1996-07-25 1996-07-25 https://www.kakabhajans.org/bhajan/default.aspx?id=12312 अखियाँ रो रही थी, दिल भी रो रहा था अखियाँ रो रही थी, दिल भी रो रहा था

नाकामयाबियों के आगे, जब सिर झुक गया, किस्मत रो रही थी।

गलतियों पर गलतियाँ जब किये जा रहा था

समझ में ना आई जब गलतियाँ, तब समझदारी रो रही थी।

दुविधाओं में डूब गया था, मार्ग ना मिल रहा था,

शंकाएँ दिल में जाग रही थी, तब विश्वास रो रहा था।

उम्मीदें दिल में जाग रही थी, कतार उनकी लगी हुई थी,

हिम्मत दिल में टूट गई थी, जब पुरुषार्थ रो रहा था।

अन्यायियों के सामने, जब न्याय झुक गया था,

हकीकतें मुरझा गई थी, तब सत्य रो रहा था।
https://www.youtube.com/watch?v=i7mCixDF6qo
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अखियाँ रो रही थी, दिल भी रो रहा था

नाकामयाबियों के आगे, जब सिर झुक गया, किस्मत रो रही थी।

गलतियों पर गलतियाँ जब किये जा रहा था

समझ में ना आई जब गलतियाँ, तब समझदारी रो रही थी।

दुविधाओं में डूब गया था, मार्ग ना मिल रहा था,

शंकाएँ दिल में जाग रही थी, तब विश्वास रो रहा था।

उम्मीदें दिल में जाग रही थी, कतार उनकी लगी हुई थी,

हिम्मत दिल में टूट गई थी, जब पुरुषार्थ रो रहा था।

अन्यायियों के सामने, जब न्याय झुक गया था,

हकीकतें मुरझा गई थी, तब सत्य रो रहा था।




सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)
Lyrics in English Increase Font Decrease Font

akhiyām̐ rō rahī thī, dila bhī rō rahā thā

nākāmayābiyōṁ kē āgē, jaba sira jhuka gayā, kismata rō rahī thī।

galatiyōṁ para galatiyām̐ jaba kiyē jā rahā thā

samajha mēṁ nā āī jaba galatiyām̐, taba samajhadārī rō rahī thī।

duvidhāōṁ mēṁ ḍūba gayā thā, mārga nā mila rahā thā,

śaṁkāēm̐ dila mēṁ jāga rahī thī, taba viśvāsa rō rahā thā।

ummīdēṁ dila mēṁ jāga rahī thī, katāra unakī lagī huī thī,

himmata dila mēṁ ṭūṭa gaī thī, jaba puruṣārtha rō rahā thā।

anyāyiyōṁ kē sāmanē, jaba nyāya jhuka gayā thā,

hakīkatēṁ murajhā gaī thī, taba satya rō rahā thā।
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Hindi Bhajan no. 6323 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
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