BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6323 | Date: 25-Jul-1996
   Text Size Increase Font Decrease Font

अखियाँ रो रही थी, दिल भी रो रहा था

  No Audio

Ankhiya Ro Rahi Thi, Dil Bhi Ro Raha Tha

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


Hindi Bhajan no. 6323 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
अखियाँ रो रही थी, दिल भी रो रहा था
नाकामयाबियों के आगे, जब सिर झुक गया, किस्मत रो रही थी।
गलतियों पर गलतियाँ जब किये जा रहा था
समझ में ना आई जब गलतियाँ, तब समझदारी रो रही थी।
दुविधाओं में डूब गया था, मार्ग ना मिल रहा था,
शंकाएँ दिल में जाग रही थी, तब विश्वास रो रहा था।
उम्मीदें दिल में जाग रही थी, कतार उनकी लगी हुई थी,
हिम्मत दिल में टूट गई थी, जब पुरुषार्थ रो रहा था।
अन्यायियों के सामने, जब न्याय झुक गया था,
हकीकतें मुरझा गई थी, तब सत्य रो रहा था।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




First...63166317631863196320...Last
Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
Pediatric Oncall
Pediatric Oncall
Pediatric Oncall
Pediatric Oncall
Pediatric Oncall