BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6371 | Date: 08-Sep-1996
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इकरार कर रहा हूँ, प्रभु आज मैं तुझमें ऐतबार कर रहा हूँ।

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Ikrar Kar Raha Hu, Prabhu , Aaj Main Tujmain Aitbar Kar Raha Hu !

પ્રાર્થના, ધ્યાન, અરજી, વિનંતી (Prayer, Meditation, Request)


Hindi Bhajan no. 6371 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
इकरार कर रहा हूँ, प्रभु आज मैं तुझमें ऐतबार कर रहा हूँ।
गलतियों की राह पर मैं चल रहा था, सही राह पर चलने की कोशिश कर रहा हूँ।
कामयाबियों के चक्कर में गुमनाम हो गया था, सही राह पर आने की कोशिश कर रहा हूँ।
मतलब से भरी हुई थी दुनिया मेरी, हर मतलब में से मैं मतलब ढूँढ़ रहा हूँ।
हर चीज जग में है भरी भरी, चाहत की दिल में है ना कमी, है पुकार मेरी दर्द भरी,
छोड़ ना सका राह बंधनों की जग में, बंधनों में मेरी मुक्ति ढूँढ़ रहा हूँ।
छुपा हुआ था प्यार जो मेरे दिल में, आँखों में और होठों पर न आ सका,
कमी ना थी कोई, जीवन में मेरे, फिर भी जीवन में मैं कमी महसूस कर रहा हूँ।
जब मालिक है तू जग का, रखना हाथ मेरे सिर पर, मैं यह अरज कर रहा हूँ।
जो जो भी हो मिलावट, दिल में तो मेरे, साफ उन्हें करना यह ख्याल में रखना।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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