BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 2744 | Date: 04-Sep-1990
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कब तक चुप रहोगे प्रभु, तुम कब तक चुप रहोगे?

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Kab Tak Chup Rahoge Prabhu,Tum Kab Tak Chup Rahoge?

પ્રાર્થના, ધ્યાન, અરજી, વિનંતી (Prayer, Meditation, Request)


Hindi Bhajan no. 2744 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
कब तक चुप रहोगे प्रभु, तुम कब तक चुप रहोगे?
देख लिया हाल-बेहाल हमारा, फिर भी तुम चुप रहोगे? कब तक...
डूब रहे हैं, हम तो माया में, क्या तुम वह देखते रहोगे? कब तक...
ढूँढ़ रहे हैं रास्ता हम तो अँधेरे में, क्या यह तुम देखते रहोगे? कब तक...
जीवन में तो गिरते रहे हैं हम, तो क्या यह तुम देख सकोगे? कब तक...
रहे हैं नाच नाचते हम तो विकाऱें में, फिर भी क्या तुम चुप रहोगे? कब तक...
है मन तो हमारा अस्थिर, क्या स्थिर मेरे मन को तो करोगे? कब तक...
डोल रही है, नाव हमारी तो संसार में, क्या स्थिर ना उसे तुम करोगे? कब तक...
कबसे पुकार रहे हैं, हम तो तुम्हें, जवाब न क्या उनका दोगे? कब तक...
आए हैं, जब द्वार पर तेरे, क्या हमें गले से ना लगाओगे? कब तक...
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)





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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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