BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 2807 | Date: 05-Oct-1990
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तेरे प्यार का उजाला चाहिये, प्रभु तेरे दर्शन का दीदार चाहिये।

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Tere Pyaar Ka Ujaala Chahiye, Prabhu Tere Darshan Ka Dedaar Chahiye

પ્રેમ, ભક્તિ, શિસ્ત, શાંતિ (Love, Worship, Discipline, Peace)


Hindi Bhajan no. 2807 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
तेरे प्यार का उजाला चाहिये, प्रभु तेरे दर्शन का दीदार चाहिये।
बस दे दे इतना तो प्रभु, ना कुछ और चाहिये।
हर श्वास में तेरी याद चाहिये, हर रोम में तेरा गुंजन चाहिये।
हर धडकन में तेरी पुकार चाहिये, तेरी कृपा की नज़र तो चाहिये।
तेरे हर कार्य में तो ऐतबार चाहिये, हर विचार की दिशा तेरी ओर चाहिये।
शांति भरी जीवन की राह चाहिये, रहूँ मग्न तेरे में ऐसी लीनता चाहिये।
कम न हो प्यार, ऐसा दिल चाहिये, हर जगह देखूँ तुझे, ऐसी नज़र चाहिये।
तू रहे राजी, ऐसा सुख चाहिये, तेरी समझ की मुझे समझ चाहिये।
हटे ना तुझ में से मन, ऐसा मन चाहिये, नाम तेरा गुनगुनाता रहूँ ऐसी धुन चाहिये।
रहूँ तुझ में पागल, ऐसा पागलपन चाहिये, तेरे प्यार की तो एक बूँद चाहिये।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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