BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 3385 | Date: 08-Sep-1991
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लकीरें पड़ी हैं जो हाथ में, करे राज जीवन भर वह मुझ पर

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Lakeeren Padee Hain Jo Haath Mein, Kare Raaj Jeevan Bhar Vah Mujh Par

શરણાગતિ (Surrender)


Hindi Bhajan no. 3385 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
लकीरें पड़ी हैं जो हाथ में, करे राज जीवन भर वह मुझ पर,
वह बात मुझे मंजूर नही, वह बात मुझे मंजूर नही।
है कोमल दिल तो पास में, रहे सहता हर दम वह सितम, वह बात मुझे ...
मिला है दिमाग तो जीवन में, चढ़ता रहे जंग तो उस पर, वह बात मुझे ...
मिली जिव्हा जीवन में, रहे करती वह फिजूल बात, वह बात मुझे ...
मिला हाथ तो जीवन में, देते देते वह जो थक जाये, वह बात मुझे ...
करता हूँ विचार तो सदा, रहे किसीका उसमें अकल्याण, वह बात मुझे ...
लेता रहा हूँ जग में तो श्वास, उपयोग बिना वह छूट जाय, वह बात मुझे ...
फिरती रहे नज़र जग में सदा, गलत देखने में मग्न हो जाये, वह बात मुझे ...
दर्द और स्वार्थ में आँसू तो मेरे बह जाएँ, वह बात मुझे ...
संजोग जीवन में मुझे जो मजबूर बनाते जाएँ, वह बात मुझे ...
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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