BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 7311 | Date: 04-Apr-1998
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फुरसत को रुखसत ना दी यदि जीवन में

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Fursat To Ruksat Na Di Yadi Jivan Main

સમય, પશ્ચાતાપ, શંકા (Time, Regret, Doubt)


Hindi Bhajan no. 7311 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
फुरसत को रुखसत ना दी यदि जीवन में,
समझो जीवन जंग-ए-ऐलान तो नासमझ।
मोहब्बत की गलियों में फिर के भी सुख शैय्या चाहते रहे,
समझो प्रेम की गलत गलियों में घूम रहे।
गैरों की आवाज सुनकर के तो जाग गये,
खुद का आवाज जब ना सुना जग में ना कुछ सुने।
सब गलियों में घूमने की फुरसत मिली, प्रभु की गलियों में क्यों ना फिरे,
सुख चैन मिले जिन चरणों में वही चरण क्यों भूल गये।
भूलने के लिये फुरसत मिली, याद रखने के लिये फुरसत ना मिली,
हर चीज में चैन ढूँढ़ता रहा, प्रभु में चैन क्यों ना मिले।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)





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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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