BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI KAKA BHAJANS

BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 7312 | Date: 05-Apr-1998
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जो भी हूँ मैं आज, ना वैसे तो पहले था

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Jo Bhi Hu Main Aaj, Na Vaise To Pehle Tha

સ્વયં અનુભૂતિ, આત્મનિરીક્ષણ (Self Realization, Introspection)


1998-04-05 1998-04-05 https://www.kakabhajans.org/bhajan/default.aspx?id=15301 जो भी हूँ मैं आज, ना वैसे तो पहले था जो भी हूँ मैं आज, ना वैसे तो पहले था,
कर कर के जीवन में सामना मैं वैसा तो गया।
अच्छा हूँ, या बुरा हूँ, हूँ मैं आज जग के सामने,
दुःख में तो जीवन बीता, जीवन मे सुखी ना बन सका।
हर हाल मे आगे बढ़ा, सोचता हूँ, क्या खोया क्या पाया?
जो जो भी जिम्मेदारी थी निभाई, कितनी और कैसे?
चलाना है, मुकद्दर जो चलाए, वैसे चलना है मुझे,
जानते हुए गुनहगार हूँ सब का, अब तो चलाऊँ कैसे?
दिल दर्द की आवाज जब सुनी, मन व्याकुल हो गया,
सोचता हूँ, जग में बाकी रही जिंदगानी बिताऊँ मैं कैसे?
https://www.youtube.com/watch?v=U8Yw-YYKg-E
Hindi Bhajan no. 7312 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
जो भी हूँ मैं आज, ना वैसे तो पहले था,
कर कर के जीवन में सामना मैं वैसा तो गया।
अच्छा हूँ, या बुरा हूँ, हूँ मैं आज जग के सामने,
दुःख में तो जीवन बीता, जीवन मे सुखी ना बन सका।
हर हाल मे आगे बढ़ा, सोचता हूँ, क्या खोया क्या पाया?
जो जो भी जिम्मेदारी थी निभाई, कितनी और कैसे?
चलाना है, मुकद्दर जो चलाए, वैसे चलना है मुझे,
जानते हुए गुनहगार हूँ सब का, अब तो चलाऊँ कैसे?
दिल दर्द की आवाज जब सुनी, मन व्याकुल हो गया,
सोचता हूँ, जग में बाकी रही जिंदगानी बिताऊँ मैं कैसे?
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)

Lyrics in English
jō bhī hūm̐ maiṁ āja, nā vaisē tō pahalē thā,
kara kara kē jīvana mēṁ sāmanā maiṁ vaisā tō gayā।
acchā hūm̐, yā burā hūm̐, hūm̐ maiṁ āja jaga kē sāmanē,
duḥkha mēṁ tō jīvana bītā, jīvana mē sukhī nā bana sakā।
hara hāla mē āgē baḍha़ā, sōcatā hūm̐, kyā khōyā kyā pāyā?
jō jō bhī jimmēdārī thī nibhāī, kitanī aura kaisē?
calānā hai, mukaddara jō calāē, vaisē calanā hai mujhē,
jānatē huē gunahagāra hūm̐ saba kā, aba tō calāūm̐ kaisē?
dila darda kī āvāja jaba sunī, mana vyākula hō gayā,
sōcatā hūm̐, jaga mēṁ bākī rahī jiṁdagānī bitāūm̐ maiṁ kaisē?

Explanation in English
In this bhajan shri Devendra Ghia ji also lovingly known as Kakaji (Satguru Devendra Ghia)by his followers. Talks about the changes in this life.
Whatever I am today, I was not like that before.
Whether I am good or bad, I am in front of this world.
Lived my life in sorrow, could not make my life happy.
In every condition I moved forward, thinking now, what I lost and gained?
Whatever the responsibility fulfilled them, how much and how?
I have to walk, how the fate moves me, I have to walk like that.
Knowing that I am guilty of all, how do I walk?
When I heard the sound of my heart ache, my mind got distraught.
I think, how can I spend rest of my life in this world?

जो भी हूँ मैं आज, ना वैसे तो पहले थाजो भी हूँ मैं आज, ना वैसे तो पहले था,
कर कर के जीवन में सामना मैं वैसा तो गया।
अच्छा हूँ, या बुरा हूँ, हूँ मैं आज जग के सामने,
दुःख में तो जीवन बीता, जीवन मे सुखी ना बन सका।
हर हाल मे आगे बढ़ा, सोचता हूँ, क्या खोया क्या पाया?
जो जो भी जिम्मेदारी थी निभाई, कितनी और कैसे?
चलाना है, मुकद्दर जो चलाए, वैसे चलना है मुझे,
जानते हुए गुनहगार हूँ सब का, अब तो चलाऊँ कैसे?
दिल दर्द की आवाज जब सुनी, मन व्याकुल हो गया,
सोचता हूँ, जग में बाकी रही जिंदगानी बिताऊँ मैं कैसे?
1998-04-05https://i.ytimg.com/vi/U8Yw-YYKg-E/mqdefault.jpgBhaav Samadhi Vichaar Samadhi Kaka Bhajanshttps://www.youtube.com/watch?v=U8Yw-YYKg-E
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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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