BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 7456 | Date: 08-Jul-1998
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ना दिल में है कोई उम्मीद भरी, ना है शिकायत भरी

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Na Dil Main Hai Koe Ummid Bhari, Na Hai Shikayt Bhari

મન, દિલ, ભાવ, વિચાર, યાદ (Mind, Heart, Feelings, Thoughts, Remembrance)


Hindi Bhajan no. 7456 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
ना दिल में है कोई उम्मीद भरी, ना है शिकायत भरी
फिर भी यह दिल मेरा, तेरा दीवाना दीवाना दीवाना है।
देना है तुम्हें, यदि शिक्षा मुझे तो इस जगमें
तो मस्तक तो यह, तुम्हारा तुम्हारा तुम्हारा है।
ढूँढ़ने निकला प्यार जग में, फिरा मैं जग के कोने-कोने में
भूल गया जीवन में, दिल तेरा प्यार का खजाना खजाना खजाना है।
तुझे ढूँढ़ने मैं फिरा, जग के कोन-कोने में,
भूल गया ढूँढ़ना तो दिल मेरा, जहाँ तेरा, बसेरा बसेरा बसेरा है।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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