BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6596 | Date: 30-Jan-1997
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तेरी इबादत, तेरी इबादत ही प्रभु, वही तो है हमारी ही दौलत

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Teri Ibadat, Teri Ibadat Hi Prabhu, Vahi To Hai Hamari Hi Daullat

પ્રેમ, ભક્તિ, શિસ્ત, શાંતિ (Love, Worship, Discipline, Peace)


Hindi Bhajan no. 6596 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
तेरी इबादत, तेरी इबादत ही प्रभु, वही तो है हमारी ही दौलत,
रखेंगे जीवन में ना हम कोई कमी, देंगे ना मौका करने के लिये शिकायत।
रचेंगे जीवन में तो हम, हमारे प्रेम की इबारत, हमारे प्रेम की ही इबारत,
है हमारे जीवन का तो एक ही मकसद, तुम्हारा प्रेम, तुम्हारी ही मोहब्बत।
चले जायेंगे हम, उसी राह पर तो तेरी, करना प्रेम भरी नज़रों की इनायत,
जब बन गया है तू हमारा, हम बन गये हैं तेरे, करे क्यों हम तो शिकायत।
रोकेगी ना राह हमें, राह है जो तेरी, रुकवा ना सकेगी, राह कोई रिश्वत,
तेरा दिया हुआ है, तुझे ही तो अर्पण, यह तो है तेरी इबादत ही इबादत।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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