BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6631 | Date: 16-Feb-1997
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हम जहाँ भी जायेंगे, हम तो तेरे आसमाँ के नीचे ही रहेंगे।

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Hum Jaha Bhi Jayege, Hum To Tere Aasman Ke Niche Hi Rahenge

જ્ઞાન, સત્ય, આભાર (Knowledge, Truth, Thanks)


Hindi Bhajan no. 6631 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
हम जहाँ भी जायेंगे, हम तो तेरे आसमाँ के नीचे ही रहेंगे।
जगह कोई नही है खाली, वहाँ पर ना तुम हमें ढूँढ़ सकोगे।
जब मैं तेरी नज़रों में से गिर जाऊँगा, ना कोई मुझे बचा सकेगा।
की है खराबी जितनी मैंने मेरी, इतनी ना और कोई कर सकेगा।
हर नशा जीवन में तो उतर जायेगा, नशा दिल पर चढ़ा तेरा बढ़ते ही जायेगा।
हर कातिल लहू से संबंध रखता है, तू है ऐसा कातिल, दिल से रखता है।
तू हमें नहीं दिखाई देता है, फिर भी हम तुझे तो साफ दिखाई देते हैं।
हम तो तेरे जग में तो, तेरे ही अधीन, बन के तो रहते हैं।
तब मेल हमारा तुम्हारा कहाँ, फिर भी एक नज़र की आस रखते हैं।
वह प्रेम के तार से बाँध लेंगे, वही प्रेम के तार से खींच लेंगे तुझे।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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