BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI KAKA BHAJANS

BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6631 | Date: 16-Feb-1997
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हम जहाँ भी जायेंगे, हम तो तेरे आसमाँ के नीचे ही रहेंगे।

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Hum Jaha Bhi Jayege, Hum To Tere Aasman Ke Niche Hi Rahenge

જ્ઞાન, સત્ય, આભાર (Knowledge, Truth, Thanks)


1997-02-16 1997-02-16 https://www.kakabhajans.org/bhajan/default.aspx?id=16618 हम जहाँ भी जायेंगे, हम तो तेरे आसमाँ के नीचे ही रहेंगे। हम जहाँ भी जायेंगे, हम तो तेरे आसमाँ के नीचे ही रहेंगे।
जगह कोई नही है खाली, वहाँ पर ना तुम हमें ढूँढ़ सकोगे।
जब मैं तेरी नज़रों में से गिर जाऊँगा, ना कोई मुझे बचा सकेगा।
की है खराबी जितनी मैंने मेरी, इतनी ना और कोई कर सकेगा।
हर नशा जीवन में तो उतर जायेगा, नशा दिल पर चढ़ा तेरा बढ़ते ही जायेगा।
हर कातिल लहू से संबंध रखता है, तू है ऐसा कातिल, दिल से रखता है।
तू हमें नहीं दिखाई देता है, फिर भी हम तुझे तो साफ दिखाई देते हैं।
हम तो तेरे जग में तो, तेरे ही अधीन, बन के तो रहते हैं।
तब मेल हमारा तुम्हारा कहाँ, फिर भी एक नज़र की आस रखते हैं।
वह प्रेम के तार से बाँध लेंगे, वही प्रेम के तार से खींच लेंगे तुझे।
Hindi Bhajan no. 6631 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
हम जहाँ भी जायेंगे, हम तो तेरे आसमाँ के नीचे ही रहेंगे।
जगह कोई नही है खाली, वहाँ पर ना तुम हमें ढूँढ़ सकोगे।
जब मैं तेरी नज़रों में से गिर जाऊँगा, ना कोई मुझे बचा सकेगा।
की है खराबी जितनी मैंने मेरी, इतनी ना और कोई कर सकेगा।
हर नशा जीवन में तो उतर जायेगा, नशा दिल पर चढ़ा तेरा बढ़ते ही जायेगा।
हर कातिल लहू से संबंध रखता है, तू है ऐसा कातिल, दिल से रखता है।
तू हमें नहीं दिखाई देता है, फिर भी हम तुझे तो साफ दिखाई देते हैं।
हम तो तेरे जग में तो, तेरे ही अधीन, बन के तो रहते हैं।
तब मेल हमारा तुम्हारा कहाँ, फिर भी एक नज़र की आस रखते हैं।
वह प्रेम के तार से बाँध लेंगे, वही प्रेम के तार से खींच लेंगे तुझे।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)

Lyrics in English
hama jahām̐ bhī jāyēṁgē, hama tō tērē āsamām̐ kē nīcē hī rahēṁgē।
jagaha kōī nahī hai khālī, vahām̐ para nā tuma hamēṁ ḍhūm̐ḍha़ sakōgē।
jaba maiṁ tērī naja़rōṁ mēṁ sē gira jāūm̐gā, nā kōī mujhē bacā sakēgā।
kī hai kharābī jitanī maiṁnē mērī, itanī nā aura kōī kara sakēgā।
hara naśā jīvana mēṁ tō utara jāyēgā, naśā dila para caḍha़ā tērā baḍha़tē hī jāyēgā।
hara kātila lahū sē saṁbaṁdha rakhatā hai, tū hai aisā kātila, dila sē rakhatā hai।
tū hamēṁ nahīṁ dikhāī dētā hai, phira bhī hama tujhē tō sāpha dikhāī dētē haiṁ।
hama tō tērē jaga mēṁ tō, tērē hī adhīna, bana kē tō rahatē haiṁ।
taba mēla hamārā tumhārā kahām̐, phira bhī ēka naja़ra kī āsa rakhatē haiṁ।
vaha prēma kē tāra sē bām̐dha lēṁgē, vahī prēma kē tāra sē khīṁca lēṁgē tujhē।

Explanation in English
This Bhajan is written by Shri Devendra Ghiaji. If you want to have any intoxication of anything better have of eternal happiness it will help you to overcome this worldly illusion.
Wherever we will go, will always remain below your sky.
No place is vacant, where you cannot search for us.
If I will fall out of sight, no one can save me.
Whatever bad I have done to myself, no one will do it to self.
The intoxication of everything in life will get over; the intoxication of yours on the heart will keep on increasing.
Every murderer is related to the blood, but you are a murderer who is related to the heart.
We cannot see you but you can see us clearly.
In your world, we all are dependent on you.
Where is the similarity of ours and yours, still look forward for your one sight.
With the thread of love, we will tie you, with that thread, we will pull you.

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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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