BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 8728 | Date: 29-Jul-2000
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हरदम करवाता रहा सामना मुझसे, ना शक्ति है मुझ में पूरी

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Haradam Karavaata Raha Saamana Mujhase, Na Shakti Hai Mujh Mein Pooree

મન, દિલ, ભાવ, વિચાર, યાદ (Mind, Heart, Feelings, Thoughts, Remembrance)


Hindi Bhajan no. 8728 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
हरदम करवाता रहा सामना मुझसे, ना शक्ति है मुझ में पूरी
है आदत तो तेरी यह बुरी (2)
कहने बैठूँ जब तेरे सामने चुप कर देता है तू मुझे
ना सुनना बात मेरी, है यह आदत तेरी बुरी।
था पास में मैं तेरे, था पास में तू मेरे, फिर भी ना जाने कैसी है ये दूरी
हमें बिठा के सामने ओझल हो जाना नज़रों से, यह ...
राह देखता हूँ मैं तेरी, नज़रों से, नज़रें ना मिलाना
आता जाता रहा, रहा मनमानी करता, तू ना आया
माना कमजोरियाँ थी, हटाई नही सब कामनायें मेरी।
हर बार देखना चाहता है मुझे, हँसता मौका पाकर रुला दिया,
मजबूरियों से भरे थे हम, ना मजबूर था तू, क्यों हालत की ऐसी मेरी।
तेरे बिना कमजोर हूँ मैं, सदा रहम ना खाई तूने मेरी
खेल खेले बहुत तूने, ना आदत में तेरी तूने कुछ बदली की।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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