Bhaav Samadhi Vichaar Samadhi - Kaka Bhajans
Bhaav Samadhi Vichaar Samadhi - Kaka Bhajans
Hymn No. 4858 | Date: 02-Aug-1993
मैं खो गया हूँ, खो गया हूँ, खो गया हूँ, पता नही, मैं कहाँ खो गया हूँ?
Maiṁ khō gayā hūm̐, khō gayā hūm̐, khō gayā hūm̐, patā nahī, maiṁ kahām̐ khō gayā hūm̐?

પ્રાર્થના, ધ્યાન, અરજી, વિનંતી (Prayer, Meditation, Request)

Hymn No. 4858 | Date: 02-Aug-1993

मैं खो गया हूँ, खो गया हूँ, खो गया हूँ, पता नही, मैं कहाँ खो गया हूँ?

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maiṁ khō gayā hūm̐, khō gayā hūm̐, khō gayā hūm̐, patā nahī, maiṁ kahām̐ khō gayā hūm̐?

પ્રાર્થના, ધ્યાન, અરજી, વિનંતી (Prayer, Meditation, Request)

1993-08-02 1993-08-02 https://www.kakabhajans.org/bhajan/default.aspx?id=358 मैं खो गया हूँ, खो गया हूँ, खो गया हूँ, पता नही, मैं कहाँ खो गया हूँ? मैं खो गया हूँ, खो गया हूँ, खो गया हूँ, पता नही, मैं कहाँ खो गया हूँ?

यकीन नही मुझे, हूँ जहाँ हूँ मैं वहाँ हूँ, या अन्य जगह में पहुँच गया हूँ?

लगता कुछ अजीब सा है, नया भी पुराना लगता है, पुराना नया लगता है,

सूरज से आगे, अँधकार में अकेला, मैं जा रहा हूँ, मैं कहाँ जा रहा हूँ?

कोई परिचित आवाज नहीं आती, मैं कहाँ दूर-दूर खींचे जा रहा हूँ?

अपरिचित धुँधले आकार दिखाई देते हैं, न जाने मैं कहाँ पहुँच गया हूँ?

कही दूर-दूर अँधेरे में, प्रकाश की बूँदें चमक उठती हैं, न जाने मैं कहाँ जा रहा हूँ?

अपरिचित आवाज और ध्वनि आ रही है, मुझे संकेत से बुलाते जा रहा है।

न जाने मैं कहाँ हूँ? कहाँ जा रहा हूँ? न जाने मैं क्या कर रहा हूँ?

न पहचान है वहाँ, सब अनजान हैं वहाँ, मैं खो गया हूँ, मैं खो गया हूँ।
https://www.youtube.com/watch?v=Y153OAoaOAs
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मैं खो गया हूँ, खो गया हूँ, खो गया हूँ, पता नही, मैं कहाँ खो गया हूँ?

यकीन नही मुझे, हूँ जहाँ हूँ मैं वहाँ हूँ, या अन्य जगह में पहुँच गया हूँ?

लगता कुछ अजीब सा है, नया भी पुराना लगता है, पुराना नया लगता है,

सूरज से आगे, अँधकार में अकेला, मैं जा रहा हूँ, मैं कहाँ जा रहा हूँ?

कोई परिचित आवाज नहीं आती, मैं कहाँ दूर-दूर खींचे जा रहा हूँ?

अपरिचित धुँधले आकार दिखाई देते हैं, न जाने मैं कहाँ पहुँच गया हूँ?

कही दूर-दूर अँधेरे में, प्रकाश की बूँदें चमक उठती हैं, न जाने मैं कहाँ जा रहा हूँ?

अपरिचित आवाज और ध्वनि आ रही है, मुझे संकेत से बुलाते जा रहा है।

न जाने मैं कहाँ हूँ? कहाँ जा रहा हूँ? न जाने मैं क्या कर रहा हूँ?

न पहचान है वहाँ, सब अनजान हैं वहाँ, मैं खो गया हूँ, मैं खो गया हूँ।




सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)
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maiṁ khō gayā hūm̐, khō gayā hūm̐, khō gayā hūm̐, patā nahī, maiṁ kahām̐ khō gayā hūm̐?

yakīna nahī mujhē, hūm̐ jahām̐ hūm̐ maiṁ vahām̐ hūm̐, yā anya jagaha mēṁ pahum̐ca gayā hūm̐?

lagatā kucha ajība sā hai, nayā bhī purānā lagatā hai, purānā nayā lagatā hai,

sūraja sē āgē, am̐dhakāra mēṁ akēlā, maiṁ jā rahā hūm̐, maiṁ kahām̐ jā rahā hūm̐?

kōī paricita āvāja nahīṁ ātī, maiṁ kahām̐ dūra-dūra khīṁcē jā rahā hūm̐?

aparicita dhum̐dhalē ākāra dikhāī dētē haiṁ, na jānē maiṁ kahām̐ pahum̐ca gayā hūm̐?

kahī dūra-dūra am̐dhērē mēṁ, prakāśa kī būm̐dēṁ camaka uṭhatī haiṁ, na jānē maiṁ kahām̐ jā rahā hūm̐?

aparicita āvāja aura dhvani ā rahī hai, mujhē saṁkēta sē bulātē jā rahā hai।

na jānē maiṁ kahām̐ hūm̐? kahām̐ jā rahā hūm̐? na jānē maiṁ kyā kara rahā hūm̐?

na pahacāna hai vahām̐, saba anajāna haiṁ vahām̐, maiṁ khō gayā hūm̐, maiṁ khō gayā hūm̐।
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Hindi Bhajan no. 4858 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
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