BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 4979 | Date: 09-Oct-1993
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कहाँ से मैं कहाँ पहुँच गया, ना पता मुझे उसका चला

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Kahaan Se Main Kahaan Pahunch Gaya, Na Pata Mujhe Usaka Chala

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


Hindi Bhajan no. 4979 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
कहाँ से मैं कहाँ पहुँच गया, ना पता मुझे उसका चला
देखा राह जिस दिन का, चला ना पता, कब आकर कब चला गया?
हुआ कैसे हुआ, पता ना चला, जीवन में वह तो कैसे हुआ?
दुख भी आया, सुख भी आया, अपनी-अपनी याद वह दे गया।
एहसास दिल में दर्द का हुआ, कभी रुका, कभी वह चला गया।
जीवन ने मुझे तो दिया, कुछ तो लिया, फिर भी खाली रह गया।
थी कोशिश तो शुरु, जहाँ पहुँचना था, रुका कैसे, पता ना चला।
विपरीत भाव दिल में जागे कैसे, टिके कैसे, ना उसका पता चला।
रह-रहकर आयी याद उनकी, आयी कैसे, ना उसका पता चला।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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