BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 5688 | Date: 23-Feb-1995
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ना मैं फरिश्ता हूँ, झूठी शानें में डूबा हुआ एक मामूली इन्सान हूँ

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Na Mai Pharishta Hoon, Jhoothee Shaanen Mei Dooba Hua Ek Maamuli Insaan Hoon

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


Hindi Bhajan no. 5688 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
ना मैं फरिश्ता हूँ, झूठी शानें में डूबा हुआ एक मामूली इन्सान हूँ,
इन झूठी शानों में डूबकर, इन झूठी शानों से मैं परेशान हूँ।
हर एक शान तो मेरी शान है, मेरी शान ही तो मेरी पहचान है,
कई शान बढ़ा रही है शान मेरी, कई शान से मैं तो परेशान हूँ।
प्रेम मेरा आधार है, प्रेम मेरी ज़िंदगी है, प्रेम तो ज़िंदगी की शान है,
प्यार जीवन का आधार है, प्यार जीवन की माँग है, प्यार जीवन की शान है।
टकराई जब शान के सामने शान, जंग ही वह शान की तो शान है,
रोना ना ज़िंदगी की तो शान है, हर हालत में मुस्कुराना जीवन की शान है।
छेड़ दी है जब जंग तो जीवन में, जीत ही तो जंग की तो शान है,
प्रभु प्रेम ही है जीवन का नशा मेरा, वह नशा तो मेरे जीवन की शान है।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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