BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 5708 | Date: 08-Mar-1995
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लोक लाज लगत है, वाणी नही बोलत है, नयना समझावत है

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Lok Laaj Laghat Hai, Vani Nahi Bolat Hai, Nayana Samjavat Hai

કૃષ્ણ, રામ, શિવ (Krishna, Ram, Shiv)


Hindi Bhajan no. 5708 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
लोक लाज लगत है, वाणी नही बोलत है, नयना समझावत है,
हूँ विवश मैं, ओ मेरे श्याम पिया।
नटखट श्याम, जब तू करत है, मीठी खटपट
दिल चाहत तू करत जात है, कहुँ रुकना, ना रुकना तू, ओ मेरे श्याम पिया।
करती नही फरियाद, फिर भी फरियाद करत जात है,
उर ना धरत वह, ओ मेरे श्याम पिया।
विनति मैं करत जात हूँ, तू मुस्कुरात जात है,
धडकन दिल की हमार बढ़त जात है, वह सही नहीं जात है
विश्वास मेरा बढ़त जात है, आधार जब तू बनत जात है,
नाव मेरी नही डोलत है, जब तेरे विश्वास में जब चलत है
समय बीतत जात है, ना वह रूकत है
तेरे दर्शन बिना जब जब जीवन जात है, वह मुझे अखरत है।
चैन दिल को नही आवत है नयन मोरे तोरे दर्शन नही पावत है
ना तू रुकत है, तोरी मनमानी करत जात है,
तब जान मेरी निकल जात है, ओ मेरे श्याम पिया।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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