राधा बन गई आज बावरी, राधा बन गई आज बावरी।
टुकुर-टुकुर नयन, देखत राह, ढूँढ़त है वह आज वनमाली
हृदयन की कुंज कुंज, गलियन में, छिप गये आज कहाँ वनमाली।
मनहर वह मुरलीधारी, क्यों रास खेलन नहीं आये वह गोवर्धनधारी
लगत नही चित्त काम में आज, चुरा गये चित्त वह मुरलीधारी।
धड़कन धडकन में उठत वह मुरली नाद, क्यों आज नही दे रहा सुनाई
क्यों आज नही दिखाई दे रहे, मंद मंद मुस्कुराते मोहन मुरलीधारी।
उलझन में पड़ गई राधा, क्यों आज नही आये मेरे प्यारे वनमाली
मनोमंथन हृदयमंथन हो गया शुरू राधा हो गई उसमें बावरी
खुल गये वहाँ तो नयन, दिखाई दिये मुस्कुराते हुए मुरलीधारी।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)