BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6366 | Date: 31-Aug-1996
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जाने अनजाने वही गुनाह में करता रहा

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Jane Aanjane Vahi Gunah Main Karta Raha

સ્વયં અનુભૂતિ, આત્મનિરીક્ષણ (Self Realization, Introspection)


Hindi Bhajan no. 6366 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
जाने अनजाने वही गुनाह में करता रहा,
आदत की जोर ने तो मुझे, मजबूर बना दिया।
सुबह किया हुआ संकल्प, शाम तक भी ना टिकता,
गिरना, उठना, निस दिन का क्रम बना दिया।
विचारों की आँधियों में पहले से फँस गया
करना पड़ा हर दिन गलतियों का मुझे तो सामना।
ना मैं उसमें बढ़ सका, ना पहाड़ जैसे खड़ा रह सका,
बढ़ती गई कमजोरी, कमजोरियो में, मैं डूबता गया।
देखते हुए भी, अंधा मैं तो बनता ही गया,
इस हाल पर में पहुँच गया, हाल सहन ना कर सका, ना रोक सका।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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