BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6379 | Date: 12-Sep-1996
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रहा नहीं जाय, रहा नहीं जाय, रहा नहीं जाय, तेरे बिन जीवन में आज

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Raha Nahi Jay, Raha Nahi Jay, Raha Nahi Jay, Tere Bin Jivan Mein Aaj

પ્રેમ, ભક્તિ, શિસ્ત, શાંતિ (Love, Worship, Discipline, Peace)


Hindi Bhajan no. 6379 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
रहा नहीं जाय, रहा नहीं जाय, रहा नहीं जाय, तेरे बिन जीवन में आज
हो रही है महसूस, तेरे कमी जीवन में तो आज।
जीवन के फूलों के आँगन में से, बह रही है अश्रुधारा आज,
किया ना था विचार जो कभी तो, लो, कर रहा हूँ मैं तो आज।
पहले भी और आज भी चल रही है श्वास, फर्क महसूस कर रहा हूँ आज,
पूरी हो ना सकी वह कमी तेरी, कमी तेरी महसूस कर रहा हूँ मैं आज।
लगता नही चित्त काम में, लगता नही चित्त कही भी तो आज,
पूरी करेगा, वह कौन कमी तेरी, सपनों में भी महसूस हो रही है कमी तेरी आज।
जीवन के सब सुख, कर न सके पूरी कमी तेरी, जो लग रही है आज
देकर दर्शन तेरे, कर दे वह कमी तू पूरी, प्रभु कर दे पूरी तू आज।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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