हर मुलाकात का कोई मतलब होता है, हर मतलब के पीछे कोई मकसद होता है।
आज खुदा मुबारक हो तुझे तेरी खुदाई, हम आए हैं तेरे दरपर सिर्फ तेरे दीदार के लिये।
कामकाज का फासला पहने हुए है हम, मतलब के लिये फुरसत हम कहाँ से लायें।
मिले जो संतोष हमें तेरे दीदार में, और संतोष जीवन में हम कहाँ से ढूँढ़ें।
जहाँ का हर चमन दे रहा है संदेसा तुझे, बागवान बनकर, चमन और खिला दे।
फिरते हुए बादल भी संदेसा दे रहे हैं, एक बार बिजली हमारे में चमकती है।
सारे जहाँ की करामत, तेरी खुदाई रोशन कर रही है, जलवा तेरा हमें उसमें दिखा दे।
हर हाल में है अगर मस्त तू, हम भी कुछ कम नही, चाहे तो इसे आजमाले।
मिला ना और कोई मुझे समझने वाला, मुझे समझने में इन्कार ना कीजिये।
बिना कहे भी समझने वाला है तू, यह आरजू हम लेकर आये हैं।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)