इंत़जार, इंत़जार, इंत़जार, जीवन में हर श्वास भरा हुआ है इंत़जार का
पिला रही है जाम तो जिंदगानी इंत़जार का, करवाकर इंत़जार।
भाग्य करवा रहा है इंत़जार, इंत़जार के बिना खाली नही है जिंदगानी
अब खुदा तू भी शामिल हो गया है इसमें, दीदार के लिये करवा रहा है इंत़जार।
हर सवाल ज़िंदगी में तो, करवा रही है सब दिल में जवाब का इंत़जार,
ज़िंदगी करती रहती है सबकी कसौटी, करवा के सबको इंत़जार।
क्या होगा, कैसे होगा, यह जानने की, है सब के दिल में इंत़जार,
हर कोई चाहता है, हर चीज की जानकारी, इस लिये, हो रही है दिल में इंत़जार।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)