BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 2738 | Date: 02-Sep-1990
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है समझदारी मुझ में तो कच्ची रे प्रभु, उन्हें अब पूरी तो कर दीजिए

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Hai Samajdaari Mujme Toh Kacchi Re Prabhu, Unhe Ab Puri Toh Kar Dijiye

પ્રાર્થના, ધ્યાન, અરજી, વિનંતી (Prayer, Meditation, Request)


Hindi Bhajan no. 2738 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
है समझदारी मुझ में तो कच्ची रे प्रभु, उन्हें अब पूरी तो कर दीजिए,
इन्सान बनाकर भेजा है जग में, इन्सान पूरा तो अब बना दीजिए।
डूबा हुआ हूँ अहंकार में तो प्रभु, अहंकार मेरा अब हटा दीजिए।
मोहपटल चढ़े हुए हैं आँखों पर, अब ह़टा तो उन्हें दीजिए।
रहा हूँ तुझसे दूर रे प्रभु, अब मुझे नजदीक तो लीजिए।
कर करुणा अब मुझ पर तो प्रभु, करुणासागर बिरद संभालिए।
रक्षण में हूँ सदा तेरी रे प्रभु, रक्षण सदा मेरी तो कर लीजिए।
डरूँ तो सदा पापों से रे प्रभु, अन्य डर मेरे दिल से हटा दीजिए।
प्रयत्नशील रहूँ सदा तेरे दर्शन का प्रभु, सफलता मुझे दीजिए।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)





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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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