BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 3177 | Date: 30-Apr-1991
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देखा तो इस जहाँ में, हर चेहरे पर, तेरा नूर चमकता दिखाई देता है।

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Dekha To Is Jahaan Mein, Har Chehare Par, Tera Noor Chamakata Dikhae Deta Hai.

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


Hindi Bhajan no. 3177 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
देखा तो इस जहाँ में, हर चेहरे पर, तेरा नूर चमकता दिखाई देता है।
हर इन्सान के दिल में, कोई न कोई तो तमन्ना दिखाई देती है।
कम इन्सान मिले चेहरे पर जिसकी झलक सत्य की दिखाई देती है।
डूबे हुए हैं खुद में इतने की, खुदाई नहीं दिखाई देती हैं।
हर दिल में धड़कन धडकती है, बोली अलग अलग निकलती है।
सब में तो लहू बहता है, फिर भी रंग सब में लाल ही रहता है।
हर इन्सान तो इन्सान होता है, भाग्य फिर भी अलग रहता है।
तन-बदन चेहरे अलग होते हैं, प्रभु फिर भी एक रहता है।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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