Bhaav Samadhi Vichaar Samadhi - Kaka Bhajans
Bhaav Samadhi Vichaar Samadhi - Kaka Bhajans
Hymn No. 3432 | Date: 03-Oct-1991
कहते हैं परवरदिगार हर बंदे से, ना मुझे और कुछ चाहिये
Kahatē haiṁ paravaradigāra hara baṁdē sē, nā mujhē aura kucha cāhiyē

જ્ઞાન, સત્ય, આભાર (Knowledge, Truth, Thanks)

Hymn No. 3432 | Date: 03-Oct-1991

कहते हैं परवरदिगार हर बंदे से, ना मुझे और कुछ चाहिये

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kahatē haiṁ paravaradigāra hara baṁdē sē, nā mujhē aura kucha cāhiyē

જ્ઞાન, સત્ય, આભાર (Knowledge, Truth, Thanks)

1991-10-03 1991-10-03 https://www.kakabhajans.org/bhajan/default.aspx?id=14421 कहते हैं परवरदिगार हर बंदे से, ना मुझे और कुछ चाहिये कहते हैं परवरदिगार हर बंदे से, ना मुझे और कुछ चाहिये,

देना है तो देना, बस थोड़ा सा प्यार चाहिये।

दिया है इस जहाँ में सब कुछ तुम्हें, शिकायत है फिर किस बात की,

ना कुछ जीवन में तुझे और चाहिये, जीवन में तुझे थोडी सी समझ चाहिये।

मिला है, सब कुछ जीवन में, न फरियाद चाहिये, थोडी सी समझ चाहिये।

आखिर इस जहाँ में तूने किया क्या बंदे, मन में तेरे, यह विचार चाहिये।

हूँ जब मैं हर समय तेरे पास, मुझे मिलने की तेरे दिल में तमन्ना चाहिये।

हर समय देख रहा है तू अन्य को, तुझे देखने की नज़र तो चाहिये।

बनाया इस जहाँ में इन्सान तुझे, पहले तुझे इन्सान बनना चाहिये।
https://www.youtube.com/watch?v=1-bQDgtQjq4
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कहते हैं परवरदिगार हर बंदे से, ना मुझे और कुछ चाहिये,

देना है तो देना, बस थोड़ा सा प्यार चाहिये।

दिया है इस जहाँ में सब कुछ तुम्हें, शिकायत है फिर किस बात की,

ना कुछ जीवन में तुझे और चाहिये, जीवन में तुझे थोडी सी समझ चाहिये।

मिला है, सब कुछ जीवन में, न फरियाद चाहिये, थोडी सी समझ चाहिये।

आखिर इस जहाँ में तूने किया क्या बंदे, मन में तेरे, यह विचार चाहिये।

हूँ जब मैं हर समय तेरे पास, मुझे मिलने की तेरे दिल में तमन्ना चाहिये।

हर समय देख रहा है तू अन्य को, तुझे देखने की नज़र तो चाहिये।

बनाया इस जहाँ में इन्सान तुझे, पहले तुझे इन्सान बनना चाहिये।




सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)
Lyrics in English Increase Font Decrease Font

kahatē haiṁ paravaradigāra hara baṁdē sē, nā mujhē aura kucha cāhiyē,

dēnā hai tō dēnā, basa thōḍa़ā sā pyāra cāhiyē।

diyā hai isa jahām̐ mēṁ saba kucha tumhēṁ, śikāyata hai phira kisa bāta kī,

nā kucha jīvana mēṁ tujhē aura cāhiyē, jīvana mēṁ tujhē thōḍī sī samajha cāhiyē।

milā hai, saba kucha jīvana mēṁ, na phariyāda cāhiyē, thōḍī sī samajha cāhiyē।

ākhira isa jahām̐ mēṁ tūnē kiyā kyā baṁdē, mana mēṁ tērē, yaha vicāra cāhiyē।

hūm̐ jaba maiṁ hara samaya tērē pāsa, mujhē milanē kī tērē dila mēṁ tamannā cāhiyē।

hara samaya dēkha rahā hai tū anya kō, tujhē dēkhanē kī naja़ra tō cāhiyē।

banāyā isa jahām̐ mēṁ insāna tujhē, pahalē tujhē insāna bananā cāhiyē।
English Explanation: Increase Font Decrease Font


The Lord is telling all humans, “I don't want anything”

“If you want to give, then give me little love.”

“Have given you everything in this world, then why you are complaining.”

“You don't need anything in life, you need to have only a little understanding in life.”

“You have got everything in life, you don’t need to complain, you just need to have a little understanding.”

“In this world ultimately what you have done, in your mind think about it.”

“All the time I am with you, you should have the longing to meet me.”

“Every time you are looking at others, you need the vision to see me.”

“Have made you as a human in this world, firstly you should become a human being.”
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Hindi Bhajan no. 3432 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
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