BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 3432 | Date: 03-Oct-1991
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कहते हैं परवरदिगार हर बंदे से, ना मुझे और कुछ चाहिये

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Kahate Hain Parvaradigaar Har Bande Se, Na Mujhe Aur Kuchh Chaahiye

જ્ઞાન, સત્ય, આભાર (Knowledge, Truth, Thanks)


Hindi Bhajan no. 3432 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
कहते हैं परवरदिगार हर बंदे से, ना मुझे और कुछ चाहिये,
देना है तो देना, बस थोड़ा सा प्यार चाहिये।
दिया है इस जहाँ में सब कुछ तुम्हें, शिकायत है फिर किस बात की,
ना कुछ जीवन में तुझे और चाहिये, जीवन में तुझे थोडी सी समझ चाहिये।
मिला है, सब कुछ जीवन में, न फरियाद चाहिये, थोडी सी समझ चाहिये।
आखिर इस जहाँ में तूने किया क्या बंदे, मन में तेरे, यह विचार चाहिये।
हूँ जब मैं हर समय तेरे पास, मुझे मिलने की तेरे दिल में तमन्ना चाहिये।
हर समय देख रहा है तू अन्य को, तुझे देखने की नज़र तो चाहिये।
बनाया इस जहाँ में इन्सान तुझे, पहले तुझे इन्सान बनना चाहिये।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)





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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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