BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 7089 | Date: 29-Oct-1997
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रुक जाइये रुक जाइये, जरा तो रुक जाइये

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Ruk Jaiye Ruk Jaiye, Jara To Ruk Jaiye

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


Hindi Bhajan no. 7089 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
रुक जाइये रुक जाइये, जरा तो रुक जाइये,
आपके गलत निर्णयों का असर, अन्य पर तो ना डालिये।
है जहाँ भी आप, एक नज़र जरा उस पर तो डालिये,
सच है, या झूठ है, वक्त ही बतलायेगा, सदा यह याद रखिये।
जिम्मेदारी है खुद के विचारों की, ना किस्म़त पर जिम्मेदारी डालिये
रह गया है दिल में जो, वापस मिलेगा, जीवन में यह मत भूलिये।
कठिन होगा वापस लेना, गलत पैर जो बढ़ाया यह मत भूलिये।
करना है कठिनाइयों का तो सामना जीवन में, ना उसे बढाइये।
रुकना पड़े रुक जाइये, मंज़िल को ना नज़र से हटाइए,
पड़े अकेले चलना चलिये, ना राह किसी के लिये रुकिये।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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