कुछ तो कहो, कुछ तो कहो, मेरे प्रभु अब कुछ तो कहो,
करता हूँ गुणगान तेरा, एक हल्की सी मुस्कान तो दो।
आना है पास तेरे, रुके ना पैर मेरे, अब ऐसा तो करो
उम्मीद भरा तो है दिल मेरा, भरी है उम्मीद तेरी उन्हें पूरी करो।
हर समय रहे याद तेरी, कुछ जीवन में ऐसा करो
जीवन में रंग भरा रहे तेरा, रंग जीवन में ऐसा तो भरो
है भाव भरा दिल तो मेरा, ना उपेक्षा उनकी तो करो,
इंत़जार की बीत रही है घड़ियाँ, अब कुछ रहम तो करो।
न दूर हो, ना पास हो, हमारी कसौटी कुछ कम करो,
दिया है भाव भरा दिल तूने, निवास अब उस में तो करो।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)