BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 3814 | Date: 14-Apr-1992
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मोह माया में खूब फिरा तू जीवन में, अब रटले तू प्रभु नाम को।

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Moh Maaya Mein Khoob Phira Too Jeevan Mein, Ab Ratale Too Prabhu Naam Ko.

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


Hindi Bhajan no. 3814 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
मोह माया में खूब फिरा तू जीवन में, अब रटले तू प्रभु नाम को।
उपाधि बिना कुछ ना मिला मोह मायामें, कर बदली, लेकर अब प्रभु नाम को।
है जो भी आयु तेरे हाथ में, सुधारले तू बाजी, लेकर अब प्रभु नाम को।
दुःखी क्यों हो रहा है, जब करना कर्म है तेरे हाथ में, जप तू प्रभु नाम को।
यत्न है तेरे पास में, विश्वास है जब साथ में, जप ले अब तू प्रभु नाम को।
ना कुछ है गँवाना, ना कुछ है लेना देना, जप ले अब तू प्रभु नाम को।
क्यों आया, कहाँ जाना, पता नही, कब तक है रहना, जप ले तू प्रभु नाम को।
है जो तेरे पास में, है प्रभु का दिया हुआ, कर ऋण अदा, जप ले प्रभु नाम को।
हर पल है साथ में, खाली नहीं तू उनके रक्षण बिना, जप ले तू प्रभु नाम को।
मन, बुद्धि, भाव साधन है दिया हुआ, जोडकर प्रभु की ओर ले तू प्रभु नाम को।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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