BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 4158 | Date: 31-Aug-1992
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एक हसीन ख्वाब था, न वहाँ कोई और था, मैं मेरी मस्ती में मस्त था

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Ek Haseen Khvaab Tha, Na Vahaan Koee Aur Tha, Main Meree Mastee Mein Mast Tha

પ્રાર્થના, ધ્યાન, અરજી, વિનંતી (Prayer, Meditation, Request)


Hindi Bhajan no. 4158 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
एक हसीन ख्वाब था, न वहाँ कोई और था, मैं मेरी मस्ती में मस्त था,
न वहाँ फिक्र चिंता का दर्द था, जो था वह मैं और मैं ही था, मैं मेरी मस्ती...
न वहाँ कोई दृश्य था, ना दृष्टि थी, अनुभव के सिवा ना और कुछ था, मैं मेरी मस्ती...
मैं कौन हूँ, क्या हूँ, न इसका पता था, जो था वह मैं और मैं ही था, मैं मेरी मस्ती...
न वहाँ कोई ज्ञान था, न ज्ञानी था, आनंद के बिना न वहाँ कुछ और था, मैं मेरी मस्ती...
न वहाँ कुछ लेना था, न देना था, जो था वह तो मैं और मैं ही था, मैं मेरी मस्ती ...
न वहाँ शब्द था, न सुनने वाला था, वहाँ तो मैं एक और एकाकार था, मैं मेरी मस्ती...
बताऊँ तो किसे बताऊँ, मैं और मेरे सिवा न वहाँ तो कोई और था, मैं मेरी मस्ती...
न वहाँ समय था, न समय का ज्ञान था, मैं खुद समय के पार था, मैं मेरी मस्ती...
न वहाँ कोई ग्लानि थी, वहाँ तो सिर्फ, आनंद, आनंद और आनंद था, मैं मेरी मस्ती...
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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