जीवन में तो जग में सब कुछ होता है, कोई हँसता है, कोई रोता है।
कोई आगे पीछे सोच के सब करता है, कोई बिना सोच के करता है।
कोई जीवन में धोखा खाता है, कोई जीवन में सब को धोखा देता है।
कोई तो राजा बनकर रहता है, कोई जीवन में व्यर्थ मजा उठाता है।
कोई जीवन में व्यर्थ चिंता करता है, कोई चिंता से दूर रहता है।
कोई जीवन में सुख की नींद सोता है, कोई दुःख में आहें भरता है।
कोई जीवन में व्यर्थ समय गँवाता है, कोई समय का उपयोग करता है।
कोई किस्मत के आगे झुक जाता है, कोई दृढ़ हो के सामना करता है।
कोई जीवन को जुआ समझ के दाँव लगाता है, कोई पाता है कोई खोता है।
कोई जीवन को आग लगाता है, कोई जीवन की तो आग बुझाता है।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)