BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6612 | Date: 08-Feb-1997
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निगाह-निगाह, फिर रही है, जगह, जगह

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Nigah-Nigah, Phir Rahi Hai, Jagah Jagah

મન, દિલ, ભાવ, વિચાર, યાદ (Mind, Heart, Feelings, Thoughts, Remembrance)


Hindi Bhajan no. 6612 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
निगाह-निगाह, फिर रही है, जगह, जगह
फिर भी नज़रमें क्यों तू नही आये, क्यों नज़र में नहीं आया?
राह देख रहे हैं हम, कदम कदम पर, राह तो तेरी,
उस राह को बना के तू तेरी, उस राह सें तू क्यों चला नही आया?
हर राह तो आसान तेरे लिये, क्या हो गई कोई मुसीबत खड़ी?
रुक गये पैर तेरे, उस राह से चल के, तू क्यों चला नहीं आता?
क्या राह मेरी, राह नहीं थी वह तेरी, इसलिये तू नहीं आया?
क्या राह अलग थी मेरी, रुक गये पैर तेरे, इसलिये तू नहीं चला आया?
चल के अब उस राह पर से तू, बना दे आसान उस राह को तू
कर रहा हूँ मैं इंत़जार तेरा, बना के राह तेरी, अब वह राह से चला आ।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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