BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6615 | Date: 08-Feb-1997
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हम तो चले जा रहे हैं, जीवन में हम तो चले जा रहे हैं

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Hum To Chale Ja Rahe Hai, Jivan Mein Hum To Chale Ja Rahe Hai

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


Hindi Bhajan no. 6615 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
हम तो चले जा रहे हैं, जीवन में हम तो चले जा रहे हैं,
पता नही, हम तो कहाँ जा रहे हैं, हम तो चले जा रहे हैं।
डगमगाते हैं पैर तो हमारे, हम तो जा रहे हैं, जहाँ पैर ले जा रहे हैं,
रास्ते हैं तो नये, दृश्य भी तो है नया, देखते देखते जा रहे हैं।
पता नहीं है मंजिल का, पता नही जीवन में हम तो कहाँ जा रहे हैं,
हमें हमारी मंजिल का नही है पता, ना औरों की मंजिल का पता है,
करे तो करे, साथ किस का ना किसी पर तो हमें यकीन है,
रुकावटों का करके सामना, जीवन में हम तो चले जा रहे हैं।
प्रभु पर रखकर यकीन, हम तो यकीनों के बल से चले जा रहे हैं।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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