BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6627 | Date: 15-Feb-1997
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ओ जाने वाले, अगर जो रुक ना सके जो तू, हमें इतना बताते जाना

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O Jane Vale, Agar Jo Ruk Na Sake Jo Tu, Hume Itna Batate Jana

મન, દિલ, ભાવ, વિચાર, યાદ (Mind, Heart, Feelings, Thoughts, Remembrance)


Hindi Bhajan no. 6627 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
ओ जाने वाले, अगर जो रुक ना सके जो तू, हमें इतना बताते जाना
जीवन में हमारा, क्या कसूर था, क्या कसूर था?
जीवन भर देखी राह मैंने तो तेरी, किया जीवन भर इंत़जार तेरा।
हटे ना हम, इंतजार से तेरे, क्या वह कसूर था मेरा?
पलक-पलक और हर श्वास में, बसा लिया हमने तो तुझे
बिताई कई रातें तेरी यादो में, डूब गया मैं तेरी यादो में।
रखा ना था विश्वास मैंने खुद पर, रखा था विश्वास मैंने तुझ पर
जब साथ चाहा तूने, दिया साथ मैंने, क्यों राह तूने बदल दी?
कभी मस्ती में कहा तूने, कभी मस्ती में कहा मैंने, क्या भूल ना सका तू उन्हें?
झलकती रही है तस्वीर तेरी मेरे दिल में, आनंद की झलक दे रही है मुझे
विरह के अग्नि में जलता रहा, क्या वह जला ना सका तुझे?
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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