BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6659 | Date: 04-Mar-1997
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चले गये उन गलियों में तो मेरे पाँव, जहाँ मुझे जाना नही था

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Chale Gaye Un Galiyo Mein To Mere Paav, Jaha Muje Jana Nahi Tha

મન, દિલ, ભાવ, વિચાર, યાદ (Mind, Heart, Feelings, Thoughts, Remembrance)


Hindi Bhajan no. 6659 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
चले गये उन गलियों में तो मेरे पाँव, जहाँ मुझे जाना नही था,
खो गया मैं उन विचारों में, जिन विचारो में मुझे खोना ना था।
फिजूल बातों में वक्त गँवा रहा, जो वक्त मुझे गँवाना नही था,
शर्म से सिर मेरा झुक गया, जो जीवन में मुझे तो झुकाना नही था।
कह रहा हूँ मैं, मेरे कारवाएँ दास्ताँ, जो मुझे किसी से कहनी न थी,
करनी ना थी जीवन में किसी की शिकायत, मेरी ही शिकायत मैं करने लगा।
करनी ना थी, जीवन में किसी से मोहब्बत, खुदा मैं तुझ से मोहब्बत कर ब़ैठा,
ऐ दिल, अब तू फिक्र कर रहा है, जब तुझे फिक्र करने वाला मिल गया।
नज़र इधर-उधर, फिरनी बंद हो जायगा, एक बार उनकी नज़रों का मिलन हो जायेगा।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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