BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 7840 | Date: 01-Feb-1999
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सदियों से यह रोग चलता है, हर बार तो यह नया लगता है

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Sadiyo Se Yah Rog Chalta Hai, Har Baaar To Yah Naya Lagta Hai

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


Hindi Bhajan no. 7840 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
सदियों से यह रोग चलता है, हर बार तो यह नया लगता है,
जग के कोने-कोने में यह रोग फैला हुआ है, चेहरे बदलता रहा है।
दिल में यह दर्द होता है, दिल ही तो इस दर्द की दवा है,
यह प्रेम का तो सैनिक है, प्रेम से प्रेम में घायल होता है।
जिस दिल से दिल को दर्द मिला, वही दिल उसकी दवा होती है,
ना देश काल का बंधन है उसे, सब में यह पाया जाता है।
इस रोग में पात्र सुंदर लगता है, मन उसकी ओर खींचता है
प्रभु भी इस रोग के तो रोगी है, भक्तों से दवा चाहते हैं।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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