BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 8731 | Date: 29-Jul-2000
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मैं जो हूँ, सो हूँ न बदलना चाहता हूँ

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Main Jo Hoon, So Hoon Na Badalana Chaahata Hoon

સ્વયં અનુભૂતિ, આત્મનિરીક્ષણ (Self Realization, Introspection)


Hindi Bhajan no. 8731 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
मैं जो हूँ, सो हूँ न बदलना चाहता हूँ,
ना बदला हूँ, जो हूँ मैं सो हूँ।
आज तक जो संस्कार है मुझ में, आदतों से मजबूर हूँ,
संजोगों के ऊपर उठना चाहता हूँ, कमजोरियों से मजबूर हूँ।
पुरुषार्थी बनना चाहता हूँ, आदत का शिकार बने जा रहा हूँ,
जीवन में आगे बढ़ना चाहता हूँ, दिल से डर ना मिटा सका हूँ।
प्रभु का पूर्ण प्रेमी बनना चाहता हूँ, माया का प्रेमी बने जा रहा हूँ,
अहं से मुक्त होना चाहता हूँ, अहं में डूबे जा रहा हूँ।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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