BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 8742 | Date: 09-Aug-2000
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खुदा करामत है तेरी कैसी लाखों किताबें पढ़ो समझ में नहीं आती

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Khuda Karaamat Hai Teree Kaisee Laakhon Kitaaben Padho Samajh Mein Nahin Aatee

પ્રકૃતિ, લીલા (Nature, Gods play)


Hindi Bhajan no. 8742 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
खुदा करामत है तेरी कैसी लाखों किताबें पढ़ो समझ में नहीं आती,
दिल में उठती हैं उम्मीदों की तरंग, लेकिन जीवन में पूरी नहीं होती।
उम्मीदों से न रखा इन्सानों को खाली, रखी इस पर तेरी रखवाली,
फैलाई जग में प्यार की बूँद बूँद तूने, रखा ना दिल इन्सान का प्रेम से खाली।
अँधेरे उजालें की धूप-छाँव में, गुजरना पड़ता है, बनता है हर इन्सान राही,
खुदा माने तू जिसे मंजूरी की मोहर, इन्सान की किस्मत रहती नही खाली।
दुःख दर्द की जाल है तूने ऐसी बिछाई, इन्सान को पड़ता है चलना बन के राही,
हर एक इन्सान के दिल में बसेरा तेरा, फिर भी इन्सान की नज़र तेरा दीदार कर नही पाती।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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