दिया जीवन जग में जिसने तुझे, याद किया क्या कभी तूने उसे?
हर साँसो की गहराई में, सुनी कभी आवाज उसकी तो तूने?
कर्मों की गलियों में फिर रहा है, उठाई नज़र क्या कभी उस की ओर
हर समय, हर जगह हाज़िर है वह, की कोशिश कभी ढूँढ़ने की उसे?
हर मंज़िल रुकती है इनके चरणों में, किया विचार इसका तूने?
दिया है जब सब कुछ इन्हें, याद किया क्या कभी उन्हें तूने?
जीने के काबिल रखा तुझे, कभी ना भूलना तू इन्हें
दी शक्ति और बुद्धि तो तुझे, क्या भूल सकेगा तू तो उन्हें।
है वह परम उपकारी, किया उपकार तुझ पर, क्या भूल सकेगा तू उन्हें,
है परम ज्योत तो तेरी, जुड़ा हुआ है वह साथ तेरे, भूलना ना तू उन्हें।
सत्गुरु श्री देवेंद्र घिया (काका)