BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6391 | Date: 24-Sep-1996
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खुदा के साथ कभी दिल मत लगाना, तू बेघर बन जायेगा

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Khuda Ke Sath Kabhi Dil Mat Lagana, Tu Beghar Ban Jayega

જ્ઞાન, સત્ય, આભાર (Knowledge, Truth, Thanks)


Hindi Bhajan no. 6391 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
खुदा के साथ कभी दिल मत लगाना, तू बेघर बन जायेगा,
लगा के भी पछतायेगा, ना लगाके भी पछतायेगा।
सब कुछ जान के भी, वह मौन रहा है, तू भी मौन बन जायेगा,
ना घरबार है उसका, तू भी बेघर बन जायेगा।
कर रहा है वह फिक्र सारे जहाँ की, तू भी जहाँ की फिक्र करने लग जाएगा।
बेमिसाल रहा है वह जहाँ में, तू भी बेमिसाल बन जायेगा।
ना खाता है, ना पीता है, वह कुछ भी, तू भी खाना पीना भूल जायेगा।
नज़र ना खोलकर के भी जहाँ पर नज़र रखता है, तू भी नज़र बंद कर देगा।
प्यार के बिना ना है उनके पास कुछ भी, तू भी प्यार का दरिया बन जायेगा।
ना है वह खुश, ना नाखुश भी, तू भी दोनो से परे हो जायेगा।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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