BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI KAKA BHAJANS

BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 7055 | Date: 12-Oct-1997
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सारी उमरिया व्यर्थ लूटा दी और उमरिया मैं कहाँ से लाऊँ?

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Saari Umariya Vyarth Luta Di Aur Umariya Main Kaha Se Lau?

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


1997-10-12 1997-10-12 https://www.kakabhajans.org/bhajan/default.aspx?id=15044 सारी उमरिया व्यर्थ लूटा दी और उमरिया मैं कहाँ से लाऊँ? सारी उमरिया व्यर्थ लूटा दी और उमरिया मैं कहाँ से लाऊँ?
असंतोष की आग जल रही है दिल में, सुख चैन कहाँ से पाऊँ?
दुःख दर्द है हकीकत जीवन की, हकीकत जीवन में वह कैसे बिसराऊँ?
मेरे ही किये पर रो रहा हूँ मैं, और कारण में कहाँ से लाऊँ?
दिल में क्रोध जला-जला के, पौधा मैं प्रेम का कहाँ से लगाऊँ?
इस दुनिया में दिल नहीं लगता, और दुनिया में कैसे बसाऊँ?
इस दुनिया में मेरे सिवाय मेरा कोई नही, औरोको मेरा कैसे बनाऊँ?
इस जग में लगती है हर बात अधूरी वह पूरी मैं कैसे कर पाऊँ?
रखता हूँ मुख हँसता, मैं दिल को रुला के, जग को मैं वह कैसे बताऊँ?
बीती उमरिया, बिना कुछ पाकर, और उमरिया मैं कहाँ से लाऊँ?
https://www.youtube.com/watch?v=8m_wDrtbPjE
Hindi Bhajan no. 7055 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
सारी उमरिया व्यर्थ लूटा दी और उमरिया मैं कहाँ से लाऊँ?
असंतोष की आग जल रही है दिल में, सुख चैन कहाँ से पाऊँ?
दुःख दर्द है हकीकत जीवन की, हकीकत जीवन में वह कैसे बिसराऊँ?
मेरे ही किये पर रो रहा हूँ मैं, और कारण में कहाँ से लाऊँ?
दिल में क्रोध जला-जला के, पौधा मैं प्रेम का कहाँ से लगाऊँ?
इस दुनिया में दिल नहीं लगता, और दुनिया में कैसे बसाऊँ?
इस दुनिया में मेरे सिवाय मेरा कोई नही, औरोको मेरा कैसे बनाऊँ?
इस जग में लगती है हर बात अधूरी वह पूरी मैं कैसे कर पाऊँ?
रखता हूँ मुख हँसता, मैं दिल को रुला के, जग को मैं वह कैसे बताऊँ?
बीती उमरिया, बिना कुछ पाकर, और उमरिया मैं कहाँ से लाऊँ?
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)

Lyrics in English
sari umariya vyartha luta di aura umariya maim kaham se laum?
asantosha ki aag jal rahi hai dila mem, sukh chaina kaham se paum?
dukh dard hai hakikata jivan ki, hakikata jivan me vaha kaise bisaraum?
mere hi kiye paar ro raah hu maim, aura karana me kaham se laum?
dila me krodh jala-jala ke, paudha maim prem ka kaham se lagaum?
isa duniya me dila nahi lagata, aura duniya me kaise basaum?
isa duniya me mere sivaya mera koi nahi, auroko mera kaise banaum?
isa jaag me lagati hai haar bata adhuri vaha puri maim kaise kara paum?
rakhata hu mukh hansata, maim dila ko rula ke, jaag ko maim vaha kaise bataum?
biti umariya, bina kuchha pakara, aura umariya maim kaham se laum?

सारी उमरिया व्यर्थ लूटा दी और उमरिया मैं कहाँ से लाऊँ?सारी उमरिया व्यर्थ लूटा दी और उमरिया मैं कहाँ से लाऊँ?
असंतोष की आग जल रही है दिल में, सुख चैन कहाँ से पाऊँ?
दुःख दर्द है हकीकत जीवन की, हकीकत जीवन में वह कैसे बिसराऊँ?
मेरे ही किये पर रो रहा हूँ मैं, और कारण में कहाँ से लाऊँ?
दिल में क्रोध जला-जला के, पौधा मैं प्रेम का कहाँ से लगाऊँ?
इस दुनिया में दिल नहीं लगता, और दुनिया में कैसे बसाऊँ?
इस दुनिया में मेरे सिवाय मेरा कोई नही, औरोको मेरा कैसे बनाऊँ?
इस जग में लगती है हर बात अधूरी वह पूरी मैं कैसे कर पाऊँ?
रखता हूँ मुख हँसता, मैं दिल को रुला के, जग को मैं वह कैसे बताऊँ?
बीती उमरिया, बिना कुछ पाकर, और उमरिया मैं कहाँ से लाऊँ?
1997-10-12https://i.ytimg.com/vi/8m_wDrtbPjE/mqdefault.jpgBhaav Samadhi Vichaar Samadhi Kaka Bhajanshttps://www.youtube.com/watch?v=8m_wDrtbPjE




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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