BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI KAKA BHAJANS

BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 4045 | Date: 19-Jul-1992
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हो गया गुनाह तो मेरा, हो गया गुनाह तो मेरा, हूँ गुनहगार प्रभु मैं तो तेरा।

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Ho Gaya Gunaah To Mera, Ho Gaya Gunaah To Mera, Hu Gunahegar To Prabhu Mai To Tera

સ્વયં અનુભૂતિ, આત્મનિરીક્ષણ (Self Realization, Introspection)


1992-07-19 1992-07-19 https://www.kakabhajans.org/bhajan/default.aspx?id=16032 हो गया गुनाह तो मेरा, हो गया गुनाह तो मेरा, हूँ गुनहगार प्रभु मैं तो तेरा। हो गया गुनाह तो मेरा, हो गया गुनाह तो मेरा, हूँ गुनहगार प्रभु मैं तो तेरा।
आया तो जग में किया ना खयाल तो तेरा, हूँ गुनहगार प्रभु मैं तो तेरा।
रखता रहा सदा खयाल तू तो मेरा, लिया ना नाम समझ के कभी तेरा।
दिया सब कुछ जग में तूने, मुझे प्रभु, भूल गया मानना आभार तो तेरा।
है सबका तू तो जग में, है तू तो मेरा, भूल गया, जीवन में है तू तो मेरा।
कटे ना रात, बीते ना दिन तो मेरा, है भरा-भरा चिंताओ से मन तो मेरा।
माया के मद में बहका बहका तो फिरा, उतर गया मद जीवन में अब तो मेरा।
दर्द भी मिला, दुःख भी मिला जीवन में, मिला ना दीदार तेरा, हूँ गुनहगार प्रभु मैं तो तेरा।
https://www.youtube.com/watch?v=-tA0vhdSn5M
Hindi Bhajan no. 4045 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
हो गया गुनाह तो मेरा, हो गया गुनाह तो मेरा, हूँ गुनहगार प्रभु मैं तो तेरा।
आया तो जग में किया ना खयाल तो तेरा, हूँ गुनहगार प्रभु मैं तो तेरा।
रखता रहा सदा खयाल तू तो मेरा, लिया ना नाम समझ के कभी तेरा।
दिया सब कुछ जग में तूने, मुझे प्रभु, भूल गया मानना आभार तो तेरा।
है सबका तू तो जग में, है तू तो मेरा, भूल गया, जीवन में है तू तो मेरा।
कटे ना रात, बीते ना दिन तो मेरा, है भरा-भरा चिंताओ से मन तो मेरा।
माया के मद में बहका बहका तो फिरा, उतर गया मद जीवन में अब तो मेरा।
दर्द भी मिला, दुःख भी मिला जीवन में, मिला ना दीदार तेरा, हूँ गुनहगार प्रभु मैं तो तेरा।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)

Lyrics in English
hō gayā gunāha tō mērā, hō gayā gunāha tō mērā, hūm̐ gunahagāra prabhu maiṁ tō tērā।
āyā tō jaga mēṁ kiyā nā khayāla tō tērā, hūm̐ gunahagāra prabhu maiṁ tō tērā।
rakhatā rahā sadā khayāla tū tō mērā, liyā nā nāma samajha kē kabhī tērā।
diyā saba kucha jaga mēṁ tūnē, mujhē prabhu, bhūla gayā mānanā ābhāra tō tērā।
hai sabakā tū tō jaga mēṁ, hai tū tō mērā, bhūla gayā, jīvana mēṁ hai tū tō mērā।
kaṭē nā rāta, bītē nā dina tō mērā, hai bharā-bharā ciṁtāō sē mana tō mērā।
māyā kē mada mēṁ bahakā bahakā tō phirā, utara gayā mada jīvana mēṁ aba tō mērā।
darda bhī milā, duḥkha bhī milā jīvana mēṁ, milā nā dīdāra tērā, hūm̐ gunahagāra prabhu maiṁ tō tērā।

Explanation in English
In this bhajan Shri Devendra Ghia ji (kakaji) is explaining the self-realization of Human entangled in this illusory world longing for god
I have sinned I have sinned
I am your criminal
I have forgotten you from the time I came to this world. I am your criminal.
You have looked after me forever but I have never taken your name.
You belong to all in this world you belong to me, I have forgotten that you are mine in this life.
Night does not pass nor the day my mind is full of worries.
In pride I have been roaming misguided but now I have come to sense.
I have got pain and unhappiness in life still longing for your glimpse.
I am your criminal.

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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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