BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6636 | Date: 19-Feb-1997
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ढूँढ़त फिरत बाहर तो क्यों तेरे नैना?

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Dhundat Firat Bahar To Kyo Tere Naina?

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


Hindi Bhajan no. 6636 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
ढूँढ़त फिरत बाहर तो क्यों तेरे नैना?
दिल जो सुख चाहत है, बाहर वह नही मिलत है।
दिल जो चाहत है, वह जब पावत है, तब सुख आवत है।
जब वह नही मिलत है, हो के निराश वह दुःख में डूबत है।
मन तो बाहर फिरत है, वह आस तो दिल में बढ़ावत है।
आस बढ़त जावत है, वह दुःख को दावत देवत है।
मन नचावत रहत है, काबू में वह जल्दी नही आवत है।
जीवन में आस जब कम रहत है, सुख के नजदीक वह पहुँचत है।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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