BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 6645 | Date: 24-Feb-1997
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अगर मगर करना तू छोड़ दे, करना है ज़ो शुरू, शुरू व़ह तू कर दे

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Agar Magar Karna Tu Chod De, Kaarna Hai Jo Shuru, Shuru Vah Tu Kaar De

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


Hindi Bhajan no. 6645 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
अगर मगर करना तू छोड़ दे, करना है ज़ो शुरू, शुरू व़ह तू कर दे,
जीवन की इस राह पर तू चल दे, जीवन की इस राह पर तू चल दे।
रुके जहाँ जो तेरे पाँव, मुकाम वहाँ तू कर दे, चलना फिर से शुरू कर दे,
करके दिल में बुलंद हौसला, मंजिल की ओर तू चल दे, मंजिल की ओर तू चल दे।
जीवन में मंजिल तय करके, मंजिल को लक्ष्य में रख कर, मंजिल की ओर तू चल दे,
खुदा तेरी मंजिल है बंदे, खुदा को दिल में रख कर, खुदा की ओर तू चल दे।
प्यार भरे दिल को साथ लेकर, तेरी मंजिल की ओर जीवन में तू चल दे,
हर कदम पर विश्वास का श्वास भर कर जीवन में ख़ुदा की ओर तू चल दे।
इधर उधर लक्ष्य बदलना तू छोड़ दे, मंजिल को लक्ष्य में रखकर मंजिल की ओर तू चल दे,
यह संतो की राय है, इस राय को ध्यान में रखते रखते, तू मंजिल की ओर चल दे।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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