BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 4869 | Date: 07-Aug-1993
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हँसना रोना चाहते हैं जग में हम, हँस नही सकते, रो नहीं सकते हम।

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Hansana Rona Chaahatehain Jag Mein Ham, Hans Nahee Sakate, Ro Nahin Hakate Ham.

જીવન માર્ગ, સમજ (Life Approach, Understanding)


Hindi Bhajan no. 4869 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
हँसना रोना चाहते हैं जग में हम, हँस नही सकते, रो नहीं सकते हम।
दिल तो गमों से भरा है, करना चाहते कम, कर ना सकते उसे हम।
बहुत कुछ करना चाहते हैं जीवन में, कुछ कर ना सके हैं हम,
करते-करते, सब कुछ तो जीवन में, आ जाता है कभीकभी नाक में दम।
उठाना है जीवन में सँभल-सँभलकर, तो हर दम तो हर कदम,
चली आ रही है, जीवन में दुःखों की बारात, करनी है उसे तो कम।
सुख की खोज चल रही है, चालू है, सुख की खोज जीवन में हर दम,
रखनी है जग में बस एक तेरी शरम, रखनी नही है जग की शरम।
मिटानी है दिल सें दुःख दर्द की हस्ति, कर देना है दिल में से उसे कम।
हँसना-रोना रोक ना सकेगी राह हमारी, डगमगा ना सकेंगे हमारे कदम।
देना शक्ति ऐसी प्रभु, उठा सके जीवन में, सही राह हम हमारे कदम।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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