BHAAV SAMADHI VICHAAR SAMADHI - Hindi BHAJAN

Hymn No. 4969 | Date: 03-Oct-1993
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घिस-घिसकर, दे गया जग को, सुगंध और शीतलता तो चंदन

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Ghis-Ghisakar, De Gaya Jag Ko, Sugandh Aur Sheetalata To Chandan

જ્ઞાન, સત્ય, આભાર (Knowledge, Truth, Thanks)


Hindi Bhajan no. 4969 by Satguru Devendra Ghia - Kaka
घिस-घिसकर, दे गया जग को, सुगंध और शीतलता तो चंदन
वह सिखा गया इन्सान तुझे, बना इस तरह तेरा तू जीवन।
कीचड़ से बाहर आकर, अलिप्त रहकर, निकला जैसे कमल
रंग काला होते हुए भी, करती रही कोयल तो मीठी गुंजन।
फिरते-फिरते खूब फेरे, रहा वही का वही, जग में तो घानी का बैल
सागर तो बना रहा है, सुख-दुःख की, भरती ओट, करनी पड़ेगी सहन।
तेरा नाखून बता रहा है, तुझे तेरा होते हुए भी, है तुझसे अलग,
देना है प्रकाश जग को, दीपक जला कर के बता गया, तुझे जग कारण जलना पड़ेगा।
जब तैरना है इस संसार में, नाव तैर कर सीखा गई, जल ऊपर तुझे उठना पड़ेगा।
उठने का आनंद लेना है जब जग में, बंधन तोड के, पंख फैलाना पडेगा।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)




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Publications
He has written about 10,000 hymns which cover various aspects of spirituality, such as devotion, inner knowledge, truth, meditation, right action and right living. Most of the Bhajans are in Gujarati, but there is also a treasure trove of Bhajans in English, Hindi and Marathi languages.
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