बोलो आप मेरे कौन हो, आप मेरे कौन हो?
मोहब्बत की राह में, आप मेरे तो चिराग हो।
तन बदन में तो आप मेरे, जुड़ा हुआ तो श्वास हो,
जहाँ जाऊँ तो है अँधेरा, आप मेरे तो प्रकाश हो।
निराशाओं में तो डूबा हुआ हूँ, आप मेरे आशा के दीप हो।
यदि मैं एक गिनती हूँ, आप मेरे तो अंदाज हो।
यदि मैं एक रहवासी हूँ, आप मेरे तो स्थान हो,
यदि मैं एक नज़र हूँ, आप मेरे तो दृश्य हो।
यदि मैं एक प्रवासी हूँ, आप मेरी तो मंजिल हो,
आप मेरे सर्वस्व हो, मैं तो आप के चरणों की धूल हूँ।
सतगुरू देवेंद्र घिया (काका)